कविता:मोबाइल रिचार्ज की समस्या
प्यार की बात करने से बात बढ़ती है,
बात बढ़ने से मोबाइल रिचार्ज घट जाती है,
रिचार्ज रकम घटने से बात अधूरी रह जाती है,
बात अधूरी रहने से, दिल और दिमाग में बेचैनी होने लगती है |
अब बेचैनी होने से ‘क्या करें’
‘क्या ना करें’ ,की समस्या आ जाती है,
समस्या आने से रकम उपाय करने की,
ख्याल आने लगती है |
रकम उपाय करने के ख्याल से,
या तो घर में चोरी करनी पड़ती है,
या तो घर वालों से किसी बहाने, रकम की मांग करनी पड़ती है,
रकम उपाय होने के बाद, मोबाइल रिचार्ज की समस्या खत्म हो जाती है |
कवि:-विवेकराज
10/9/2012
10/9/2012



2 Comments
Nice rows line
ReplyDeleteNice poem
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