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कविता:प्रेमिका चांद [ Premika Chand ][ Girlfriend moon ]


कविता:प्रेमिका चांद

ऐ चांद ! सूरज को देख कर,
शरमा न जाना,
ऐ चांद ! किरण से बचने के लिए,
बादलों का सहारा न लेना,
ऐ चांद ! अपनी मांग और तिलक के लिए,
तारों को बिंदी बना लेना,
ऐ चांद ! सूरज जलता है तो जलने दे,
पर आकाश के पास जाना न भूलना |


कवि:-विवेकराज

       3/9/2012

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