अगर खुशी न होता,
तो जीत और सफलता का एहसास कराता कौन ?
अगर गम न होता,
तो हार और समस्या का टेंशन देता कौन ?
अगर कष्ट न होता,
तो दुख और दर्द का अनुभव कराता कौन ?
अगर बुद्धि न होता,
तो अच्छे और बुरे विचारों का तर्क करता कौन ?
अगर मन न होता,
तो विचारों और सपनों का बुनियाद बुनता कौन ?
अगर दिल न होता,
तो नफरत और प्यार का पाठ पढ़ाता कौन ?
कवि-विवेकराज
4/11/2013



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Gjb
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