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कविता:क्या कहूं मैं टीचर्स के बारे में [Kya Kahu Mai Teachers Ke Bare Me ] [ What Should I say about teachers ]



कविता:क्या कहूं मैं टीचर्स के बारे में

क्या कहूं मैं टीचर्स के बारे में,
उनकी गिनती होती चमकती तारों-सितारों में,
उनकी एक-एक सीख होती अमूल्य उपहारों में,  
क्या कहूं मैं टीचर्स के बारे में |


क्या कहूं मैं टीचर्स के बारे में,
दूर होता हूं घर से देश-प्रदेश की शिक्षा संस्थानों में,  
कहते माता-पिता मुझे समझो, पर अकेला न समझो अपने बारे में,
क्या कहूं मैं टीचर्स के बारे में |


क्या कहूं मैं टीचर्स के बारे में,
डांट भी देते; स्नेह भी देते; जैसे माता-पिता के इशारों में,
अच्छा करने की परामर्श भी देते;
प्रेरित भी  करते; जैसे उपदेशक-विचारों में,
क्या कहूं मैं टीचर्स के बारे में |


क्या कहूं मैं टीचर्स के बारे में,
सुना था ईश्वर एक हैं,पर इनके रूप होते हैं हजारों में,
टीचर्स भी होते महात्माओं, विचारवानो के अवतारों में,
क्या कहूं मैं टीचर्स के बारे में |

कवि:-विवेकराज
9/10/2015

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