कविता:अंग-गुण
सांस है तो जिंदगी है,
आंख है तो संसार है,
गला है तो गीत है,
उंगली है तो संगीत है,
पैर है तो नृत्य है,
दिल है तो दीवानगी है,
दिमाग है तो कलाकारी है,
मन है तो सपना है,
बुद्धि है तो विद्वानता है,
यह सभी अंग है तो इंसान है,
अगर यह सभी गुण है तो आप महान हैं |
कवि:विवेकराज 7/9/2014
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