चित्र -चित्र की कोई लिपि नहीं होती है जिसे याद किया जाए | चित्र के दृष्टि रेखा होती है, जिसकी छवि को मन मस्तिष्क में अंकित करके रखना पड़ता है | उसके चित्रित अनुभव को मन मस्तिष्क में समा कर रखना पड़ता है|
गणित- गणित की लिपि होती है | गणित के सूत्र-भाषा को याद किया जा सकता है, पर गणित को बनाने के क्रम-भाषा को याद नहीं किया जा सकता | इसी क्रम-भाषा को अभ्यास कार्यकारी अनुभव में संचित कर दिया जाता है और तब उस गणित की कार्यकारी अनुभव को मन-मस्तिष्क में संचित कर लेते हैं
Thinker-Vivekraj
16/12/2012



0 Comments