AUTHOR

header ads

Poetry:प्यार की दुनिया में चार दिन की चांद** [ Part 4:प्यार वाली शायरी ]


मैं चांद की सूरत में,
चमक और मुस्कान निहारने में लगा हूं**
मैं चांद की दिल में,
अपना प्यार की दुनिया ढूंढने में लगा हूं**

मैंने चांद को पूरब से,
पश्चिम की ओर चलते देखा**
पर हमारी इस प्यारी चांद को पश्चिम से,
पूरब की ओर चलकर आना पहली बार देखा**

जितना उजरे-बिखरे लगते हैं ये आसमान,
सूरज,चांद और सितारों के बिना**
उतना ही उदासीन लगता है हमारे ये जिंदगी,
खुशी,ममता और प्यार के बिना**

प्यार की अहसास को,
दिल में समा के रखो**
चाहत की धड़कन और चाहत की आवाज को,
जान में बसा के रखो**

तूने प्यार की दुनिया में चार दिन की चांद क्या लाई कि,
हमदोनों की किस्मत हमसे जलने लगा**
तूने मेरी नजरों से चार दिन के लिए गुम क्या हो गई कि,
तड़प की आग में मेरा तन-मन जलने लगा**
                                                                                                       Shire: Vivekraj
                                               Thanks For Watching

Post a Comment

0 Comments